48 गेंद खेल मचाई तबाही, 23 साल बाद भरा ‘कबीर खान’ का जख्म, आंसुओं ने बयां किया दर्द

मुंबई को फाइनल में हराकर मध्य प्रदेश ने पहली बार रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy 2022) का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया. मध्य प्रदेश की टीम 23 साल बाद ख़िताब जीतने में सफल रही. मैच के अंतिम दिन मुंबई के द्वारा दिए 108 रनों के लक्ष्य को मध्य प्रदेश ने 4 विकेट खोकर हासिल करते हुए जीत दर्ज की.

सरफ़राज़ खान बने प्लेयर ऑफ़ द सीरीज

फाइनल मुकाबले में शानदार शतक लगाने वाले शुभम शर्मा को प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया. वहीं पूरे रणजी सीजन अपने बल्ले से लगातार रन बनाने वाले सरफ़राज़ खान प्लेयर ऑफ़ द सीरीज बने.

इससे पहले अंतिम दिन मुंबई ने अपने कल के स्कोर 113/2 से आगे खेलना शुरू किया. कल के नाबाद बल्लेबाज अरमान जाफर 37 रन बनाकर आउट हुए. सुवेद पारकर ने सेट होकर अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन 51 रन के निजी स्कोर पर कुमार कार्तिकेय ने उन्हें अपना शिकार बनाया.

सरफराज खान ने खेली ताबड़तोड़ पारी

पहली पारी में अर्धशतक लगाने वाले यशस्वी जायसवाल महज 1 रन का ही योगदान दे पाए. सरफ़राज़ खान ने तेजी से रन बनाने का प्रयास किया और 48 गेंदों में 45 रन बनाकर आउट हुए. निचले क्रम में और कोई बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हुआ और मुंबई की पूरी टीम 57.3 ओवर में 269 रन के स्कोर पर सिमट गई.

कुमार कार्तिकेय ने समेटी मुंबई की पारी

मध्य प्रदेश के लिए कुमार कार्तिकेय ने सबसे ज्यादा 4 विकेट हासिल किये. इसके अलावा गौरव यादव और पार्थ साहनी ने भी 2-2 विकेट हासिल किये. फाइनल में मध्य प्रदेश के गेंदबाजों ने टीम को शानदार शुरुआत दिलाई और पृथ्वी शॉ की मुंबई टीम की पहली पारी को 374 रन पर ही रोक दिया.

वहीं वहीं मध्य प्रदेश ने 536 रन का विशाल स्कोर बनाया था. सरफराज को मैन ऑफ़ द सीरीज के रूप में एक लाख रुपये का चेक मिला. मध्य प्रदेश की पहली में 3 शतक लगे. यश दुबे ने 133 रन, शुभम शर्मा ने 116 रन और रजत पाटीदार ने 122 रन बनाए. वहीं सारांश जैन ने 57 रन की पारी खेली.

23 साल बाद पूरा हुआ चन्द्रकांत का सपना

मध्य प्रदेश ने रविवार को 41 बार की चैंपियन मुंबई को छह विकेट से हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता है. पिछली बार यह टीम साल 1998-99 के सीजन में फाइनल में पहुंची थी. यह मुकाबला बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला गया था. हालांकि तब मध्य प्रदेश को कर्नाटक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. मध्य प्रदेश की टीम की कप्तानी उस समय चंद्रकांत पंडित के हाथों में थी.

पहली बार चैम्पियन बनी मध्य प्रदेश की टीम

सालों बाद चंद्रकांत एक बार फिर मध्य प्रदेश लौटे. इस बार एक कोच की हैसियत से उन्होंने टीम की जिम्मेदारी संभाली. वह टीम को फिर से रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचाने में कामयाब रहे. इस बार उनकी टीम चैंपियन बनने में कामयाब रही और उन्होंने अपने कोच के 23 साल पुराने सपने को पूरा कर दिया.

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