पिता ने प्लाट बेचकर बेटियों और बेटे को बनाया बाक्सिंग चैंपियन, नाराजगी जताने वाले अब बजाते हैं तालियां

पानीपत के शिवाजी स्टेडियम की बाक्सर 13 वर्षीय तृप्ति शर्मा को रिश्तेदार कहते थे कि बाक्सर नहीं बन पाओगी। बाक्सिंग छोड़ पढ़ाई पर ध्यान दे। तंज सुनकर वह कई बार रोई भी। उनके पिता अटावला गांव के सुनील दत्त चट्टान की तरह मजबूती से खड़े रहे।

जिद थी कि तीनों बच्चों को बाक्सर बनाऊंगा

सुनील दूध बेचकर व किराना की दुकान चलाकर परिवार का पोषण कर रहे थे। लाकडाउन में प्रवासी कामगार उधार चुकता किए बगैर चले गए। घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। रिश्तेदारों से कर्ज लिया। फिर भी घर का आर्थिक संकट दूर नहीं हो पाया। रिश्तेदारों ने कहा कि दोनों बेटियों का खेल छुड़वा दो। बेटे का खेल जारी रखो।  सुनील दत्त को जिद थी कि तीनों बच्चों को बाक्सर बनाऊंगा। चाहे उसे मजदूरी ही क्यों न करनी पड़े। बच्चे बिना बाधा के खेल सकें। इसलिए उसने न्यू माडल टाउन का प्लाट बेच दिया। अब कामगारों की राजपुताना कालोनी में रहते हैं। सुनील का हालात से न हारने का हौसला और बच्चों की मेहनत रंग लाई। दोनों बेटियों व बेटे ने बाक्सिंग में पदक जीते हैं।

बेटियां भरोसे पर खरी उतरी

अब मंझली बेटी तृप्ति 9 से 27 मई को कर्नाटक के बैलारी में होने वाली सब जूनियर नेशनल बाक्सिंग चैंपियनशिप में दमखम दिखाएगी। सुनील दत्त ने दैनिक जागरण से बातचीत में बताया कि आर्थिक संकट की वजह से वह डिप्रेशन के शिकार हो गए। अस्पताल में भर्ती रहे। गृहणी पत्नी सुनील देवी और शिवाजी स्टेडियम के बाक्सिंग कोच सुनील पंवार ने साथ दिया। उसने किसी की परवाह नहीं की। बेटे व बेटियों में भेद नहीं किया। यकीन था कि बेटियां सफल होंगी। बेटियां भरोसे पर खरी उतरी हैं। नाराजगी जताने वाले लोग अब उनके बच्चों की सफलता पर तालियां बजाते हैं।

छोटे भाई को देख बाक्सिंग का अभ्यास शुरू किया 

सुनील दत्त ने बताया कि छोटा बेटा 11 वर्षीय यश तेजी से पंच मारता था। ढाई साल पहले बेटे यश को शिवाजी स्टेडियम में ले गया। कोच सुनील ने ट्रायल लिया और उन्हें सलाह दी कि यश को बाक्सिंग कराओ। बड़ी बेटी 16 वर्षीय आस्था व मंझली बेटी तृप्ति ने भी यश को बाक्सिंग करते देखती थी। दोनों बेटियों ने भी अभ्यास शुरू कर दिया। दोनों ही अब सफल बाक्सर हैं।

दोनों बहनें व भाई भी जीत चुका है पदक

यश ने जिला स्तरीय बाक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। आस्था जिला स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण और राज्य स्तरीय बाक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी है। तृप्ति ने अप्रैल में हुई राज्य स्तरीय बाक्सिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। तीनों बच्चों की सफलता देख अब रिश्तेदार उनकी तारीफ करते हैं। सहयोग का भी आश्वसन देते हैं।

तीनों बच्चों से युवा लें सीख

बाक्सिंग कोच सुनील पंवार का कहना है कि तृप्ति, आस्था व यश को भी तकनीक सिखाई जाती है। उसे सीख कर नियमित अभ्यास करते हैं। लाकडाउन में तीनों ने घर पर व कालोनी के पास खेत में अभ्यास किया।

तृप्ति ने पहली ही राज्य स्तरीय बाक्सिंग चैंपियनशिप में भाग लिया और स्वर्ण पदक जीता। जीत बड़ी है। आर्थिक संकट भी आया, लेकिन बच्चों ने हार नहीं मानी। अन्य युवाओं ने भी इन बच्चों से सीख लेकर खेलों में आग बढऩा चाहिए।

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