सचिन का दिल तोड़कर रचा इतिहास, 29 साल बाद भी रिकॉर्ड के नहीं कोई आस-पास, ये क्रिकेटर बहुत खास है

साउथ अफ्रीका के पूर्व टेस्ट और वनडे क्रिकेटर और संभवतया विश्व क्रिकेट के महानतम फील्डर जॉन्टी रोड्स का आज जन्मदिन है. रोड्स का जन्म 27 जुलाई 1969 को साउथ अफ्रीका के नटाल प्रांत में पीटरमेरिट्जबर्ग में हुआ था. यहीं से उन्होंने क्रिकेट की शुरुआत की. सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि कई अन्य खेलों की भी, जिसमें रग्बी और हॉकी भी शामिल थे. इन खेलों ने ही रोड्स को एक बेहतरीन एथलीट बनने में मदद की.

क्रिकेट को बदलने वाला पल

रोड्स को सबसे पहले और सबसे बड़ी पहचान 1992 के विश्व कप में मिली. ये साउथ अफ्रीका का पहला विश्व कप था और रोड्स ने भी इसी टूर्नामेंट से अंतरराष्ट्रीय करियर में डेब्यू किया. टूर्नामेंट में पाकिस्तान के खिलाफ ब्रिसबेन में हुए मुकाबले ने विश्व क्रिकेट में बड़ा बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई और इसके नायक थे रोड्स. पाकिस्तान के बल्लेबाज इंजमाम उल हक एक शॉट खेलने में नाकाम रहे और गेंद पैड से लगकर पॉइंट की ओर गई. इंजमाम रन के लिए दौड़े लेकिन उन्हें बीच से लौटना पड़ा. इससे पहले कि वह क्रीज के अंदर पहुंच पाते, पॉइंट से बिजली की रफ्तार के साथ आए जॉन्टी ने गेंद को लपका और दौड़ते हुए खुद हवा में गोता लगाते हुए स्टंप्स बिखेर दिए.

इस एक रनआउट ने विश्व क्रिकेट में तहलका मचा दिया. आज के दौर में अगर ऐसा कुछ पहली बार हुआ होता, तो ये कई दिनों और महीनों तक ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शेयर हो रहा होता.

टूटा सचिन का दिल, बन गया इतिहास

इस रन आउट ने हर क्रिकेट टीम को फील्डिंग की ओर गंभीर रुख अख्तियार करने में अहम भूमिका निभाई. वैसे जॉन्टी ने पूरे करियर में और भी कई बेहतरीन उदाहरण पेश किए और इसमें से एक उसी साल नवंबर में आया. 1992 में जॉन्टी ने भारत के खिलाफ डरबन में टेस्ट डेब्यू किया और दूसरे दिन ही इतिहास रच दिया. मैच के दूसरे दिन भारत की पहली पारी में जॉन्टी ने युवा भारतीय स्टार सचिन तेंदुलकर को अपनी तेजी से मात दी और उनके स्टंप्स बिखेर दिए. हालांकि, अंपायर ने खुद फैसला नहीं दिया और इसके लिए तीसरे अंपायर की मदद ली. तीसरे अंपायर ने कुछ रिप्ले देखने के बाद सचिन को आउट दिया और इस तरह क्रिकेट इतिहास में थर्ड अंपायर की मदद से रन आउट का ये पहला मामला बन गया.

29 साल बाद भी रिकॉर्ड कायम

एक इतिहास के बाद दूसरे इतिहास की बारी थी. ठीक एक साल बाद नवंबर 1993 में साउथ अफ्रीकी टीम भारत में थी और पांच टीमों के हीरो कप वनडे टूर्नामेंट में वेस्टइंडीज-साउथ अफ्रीका की टक्कर हुई. इस मैच रोड्स ने कुछ ऐसा किया, जो न उससे पहले कभी हुआ था और न फिर कभी. रोड्स ने इस मैच में कुल पांच कैच लपक कर इतिहास रच दिया. उन्होंने मैच में 40 रन भी बनाए, लेकिन चर्चा सिर्फ उन 5 कैचों की रही. 29 साल बाद भी कोई आज तक इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाया है. इतना ही नहीं इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जो इस तरह का इकलौता उदाहरण है.

बल्ले से भी कमाल थे रोड्स

हालांकि, जॉन्टी का करियर सिर्फ उनके हैरतअंगेज रनआउट या कैचों के कारण खास नहीं था, बल्कि बल्ले से भी उन्होंने साउथ अफ्रीका को मुसीबत से उबारने वाली कई पारियां खेलीं. अपने करियर में जॉन्टी ने 52 टेस्ट खेले, जिसमें 35 से ज्यादा की औसत से 2532 रन बनाए, जिसमें 3 शतक और 17 अर्धशतक शामिल थे. ODI में उन्होंने 245 मैचों की 220 पारियों में 5935 रन बनाए, जिसमें 51 बार नॉट आउट रहे. उनका औसत 35 का रहा, जिसमें 2 शतक और 33 अर्धशतक शामिल थे.

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