10 साल हो गए सुनते-सुनते, लोग बोलते रहते हैं, मैं करता रहता हूं, वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे से पहले बोले शिखर धवन

भारत के सीनियर सलामी बल्लेबाज शिखर धवन का कहना है कि वह युवा खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी फॉर्म को लेकर हो रही आलोचना से परेशान नहीं हैं। उनका कहना है कि वह पिछले 10 साल से इस तरह की बातें सुनते आ रहे हैं।

कभी रोहित शर्मा और विराट कोहली के साथ भारत के शीर्ष बल्लेबाजों में शामिल रहे शिखर धवन वेस्टइंडीज के खिलाफ शुक्रवार 22 जुलाई से वेस्टइंडीज में शुरू हो रही तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज में कई नए खिलाड़ियों से सजी टीम की अगुआई करेंगे।

पहले एकदिवसीय मैच की पूर्व संध्या पर जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या आलोचना उन्हें अजीब लगती है? तब शिखर धवन ने जवाब दिया, ‘अजीब क्या लगेगा, अब तो ऐसा सुनते हुए 10 साल हो गए हैं। लोग बोलते रहते हैं, मैं प्रदर्शन करता रहता हूं। अगर मैं उनकी बात सुनता, तो मैं आज यहां नहीं होता।’

शिखर धवन ने कहा, ‘मेरे पास अनुभव है, इसलिए मैं ज्यादा चिंतित नहीं हूं। जब तक मैं आत्म विश्लेषण और सुधार करता रहूंगा, तब तक कुछ भी मायने नहीं रखता। मैं बेहद सकारात्मक इंसान हूं। मेरे लिए सकारात्मकता आत्म-विश्वास और मनोबल बढ़ाने से जुड़ी है। मैं यहां इसलिए हूं, क्योंकि मैंने कुछ अच्छा काम किया है। यही सकारात्मकता मैं युवाओं में भरना चाहता हूं।’

युवा साथियों के साथ खेलते हुए शिखर धवन के दिमाग में क्या चलता रहता है, नीचे Video में सुनें

 

पिछले टी20 विश्व कप टीम में खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर होने वाले शिखर धवन को एकदिवसीय टीम में खुद को फिर से स्थापित करने की उम्मीद है। ऐसे समय जब युवा खिलाड़ी मिले मौकों का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं, तब शिखर धवन को ऋतुराज गायकवाड़, इशान किशन और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों से कड़ी चुनौती मिलेगी।

शिखर धवन ने टीम इंडिया के हेड कोच राहुल द्रविड़ के साथ अपने रिश्ते के बारे में कहा, ‘उनके साथ मेरा बहुत अच्छा रिलेशन है। हम श्रीलंका भी गए थे साथ में। वहां से एक अच्छा बॉंड क्रिएट हुआ और निश्चित रूप से जब मैं सीनियर टीम में खेलने जाता हूं, तो वहां भी राहुल भाई रहते हैं तो एक बॉंड क्रिएट हो जाता है और अंडरस्टैंडिंग हो जाती है।’

शिखर धवन ने आगे कहा, ‘मैं सोचता हूं कि मेरी एनर्जी और मेरा स्वभाव ऐसा है कि जिससे मैं सबसे घुल-मिलकर साथ में रहते हैं तो उसमें हंसी मजाक भी चलता रहता है। काम तो रहता ही है। काम अपनी जगह है, लेकिन हंसी मजाक होना भी बड़ा जरूरी है, क्योंकि वह जीवंतता बहुत अच्छा बॉंड क्रिएट (बनाती) करती है।’

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