ना गेंद समझ आई, ना कप्तानी, एक तो कंफ्यूज ही निकला, 3 कप्तान जो IPL 2023 में बदले जा सकते हैं

आईपीएल 2022 हार्दिक पांड्या को पहली बार में ही बतौर कप्तान खिताब दिला कर चला गया है क्योंकि उनकी टीम ने 29 मई की रात राजस्थान रॉयल्स को हराकर अपने पहले सीजन में ट्रॉफी को हासिल कर लिया। हार्दिक पांड्या गुजरात टाइटंस के एक लीडर बन कर उभरे तो वही संजू सैमसन की कप्तानी ने भी प्रभावित किया। नई टीम को संभालते हुए केएल राहुल भी अच्छे नजर आए और विराट कोहली की जगह कप्तानी कर रहे फाफ डु प्लेसिस ने भी अपने कप्तानी कौशल से प्रभावित करने का काम किया।

कप्तानों के रोल की कई अदला-बदली देखने को मिली

इस सीजन में कप्तानों के रोल की कई अदला-बदली देखने को मिली जहां रवींद्र जडेजा को महेंद्र सिंह धोनी से ऊपर कप्तान बनाया गया। लेकिन बाद में यह फैसला ना जडेजा को रास आया ना ही सीएसके को। दूसरी ओर युवा मयंक अग्रवाल थे जिन्होंने केएल राहुल के चले जाने के बाद कमान संभाली और लियम लिविंगस्टोन जैसे खिलाड़ियों ने उनकी भरसक तारीफ की। ऐसे ही सनराइजर्स हैदराबाद की कमान केन विलियमसन ने संभाली जो डेविड वॉर्नर के चले जाने के बाद आए थे और इस टीम ने लगातार पांच मैच जीतकर एक समय काफी प्रभावित किया था।

अगले सीजन में कौन से तीन कप्तान बदले जा सकते हैं

एक और नए कप्तान नजर आए श्रेयस अय्यर जिन्होंने दिल्ली कैपिटल्स की कमान बहुत प्रभावी तरीके से संभाली थी और 2022 सीजन में केकेआर का बहुत प्रभावशाली तरीके से नेतृत्व करने की कोशिश की। केकेआर उनकी अगुवाई में शुरुआती स्तर पर काफी सफल भी रही हालांकि वे बाद में एक टीम के तौर पर संगठित नहीं हो पाई और अपने मुकाबले हारते चले गए। तो हमने इस बीच कुल मिलाकर इस सीजन में कप्तानों का बहुत रोल देखा, कुछ खराब लगे और कुछ बहुत प्रभावी। ये भी उम्मीद है कि इसी सिलसिले हमें अगले सीजन में भी कप्तानों में बदलाव देखने के लिए मिल सकते हैं। इस आर्टिकल में हम ऐसी तीन फ्रेंचाइजी की बात करेंगे जो आईपीएल 2023 के लिए अपने कप्तानों को बदल सकती है।

केएल राहुल के दोस्त मयंक अग्रवाल

यहां पर हम सबसे पहले केएल राहुल के दोस्त मयंक अग्रवाल का नाम देखते हैं जिनकी अगुवाई में पंजाब किंग्स काफी बेहतर भी लगी लेकिन बहुत कुछ करने की उम्मीद फैंस के दिलों में छोड़ गई। पंजाब किंग्स ने लीग स्टेज में 7 मुकाबले जीते और सात ही हारे लेकिन यह मयंक अग्रवाल की खराब परफॉर्मेंस थी जिसके चलते इस टीम को एक जरूरी रफ्तार नहीं मिल सकी। कप्तान की भूमिका एक खिलाड़ी के तौर पर भी है लेकिन मयंक अग्रवाल ने 13 मुकाबलों में केवल 16.33 के औसत के साथ ही बल्लेबाजी की और 196 रन ही बनाए।

योग्य दावेदार खुद ओपनिंग जोड़ीदार हैं

जबकि पिछले सीजन में वे 40 से ऊपर के औसत के साथ 441 रन बना चुके थे। मयंक अग्रवाल कभी ओपनिंग में आए कभी मध्यक्रम में खेले लेकिन टीम को उसका कोई फायदा नहीं मिला। पंजाब किंग्स की टीम शिखर धवन को कप्तान नियुक्त कर सकती है क्योंकि वह भारतीय टीम की अगुवाई कर चुके हैं और मयंक अग्रवाल से सीनियर है।

कंफ्यूज सीएसके अगले सीजन में बेबाक होना चाहेगी

हम अगले सीजन में महेंद्र सिंह धोनी को शायद एक कप्तान के तौर पर ना देख पाए लेकिन धोनी एक खिलाड़ी के तौर पर जरूर उपस्थित हो सकते हैं क्योंकि उन्होंने ऐसे संकेत दिए हैं। धोनी ने इसी सीजन में ही कप्तान ना बनने की ख्वाहिश जता दी थी जिसके बाद जडेजा को कमान सौंपी गई थी। अभी अगले सीजन में काफी समय बाकी है और चेन्नई सुपर किंग्स धोनी के विकल्प को कहीं ना कहीं तलाश रही होगी क्योंकि उसके बाद उनको एक ऐसे कप्तान की जरूरत पड़ेगी जो आने वाले चार-पांच सालों में टीम की गाड़ी को खींच रखे।

जडेजा और धोनी से हटकर कुछ और सोचना होगा

वैसे भी इस बार जडेजा हों या फिर धोनी, इनकी कमान में चेन्नई सुपर किंग्स कोई कमाल नहीं दिखा सकी और अंक तालिका में नौवें स्थान पर समाप्त हुई। धोनी से लेकर जडेजा तक, सीएसके का पूरा मैनेजमैंट इस सीजन में कंफ्यूज निकला। उनको पता नहीं था किसकी लीडरशिप में कैसे आगे बढ़ना। धोनी ने पहले कमान छोड़ी और फिर हासिल कर ली। यही हाल जडेजा का रहा, जिन्होंने जोर-शोर से कप्तानी ली और वैसे ही मुंह छिपाकर छोड़ भी दी। इस बात की बहुत संभावनाएं हैं कि रवींद्र जडेजा को फिर से कप्तान की भूमिका नहीं सौंपी जाएगी ऐसे में नीलामी में देखना होगा कि चेन्नई सुपर किंग्स किस तरह की रणनीति के साथ उतरती है।

केन विलियमसन काफी खराब दिखाई दिए

डेविड वॉर्नर की जगह पर कमान संभालने के लिए आए केन विलियमसन काफी खराब दिखाई दिए। यह खिलाड़ी खुद भी बैटिंग में कमाल नहीं दिखा सका और कप्तानी में भी थका दिखाई दिया। हालांकि इस टीम ने बीच में बहुत अच्छा परफॉर्म किया जब उमरान मलिक का उभर हुआ और उन्होंने लगातार पांच मैच भी जीते लेकिन उससे पहले भी लगातार दो मैच हार चुके थे और बाद में भी उन्होंने खूब मैच हारे जिसके चलते उनको अंक तालिका में आठवें स्थान मिला।

ना गेंद समझ आई, ना कप्तानी

सनराइजर्स हैदराबाद आठ मुकाबले हारकर और छह मुकाबले ही जीत कर किसी भी स्तर पर प्लेऑफ में जाती हुई नहीं दिखाई दी। केन विलियमसन बिल्कुल भी अपनी टीम को प्रेरित करने में कामयाब नहीं रहे और उन्होंने 13 मैचों में 19.64 की औसत से 216 रन बनाकर साबित कर दिया कि वह एक बल्लेबाज के तौर पर भी लीड नहीं करेंगे। रही-सही कसर उनके 93.5 के स्ट्राइक रेट ने पूरी कर दी। आने वाले सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद शायद किसी और कप्तान को लाने के लिए सोचेगी।

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