दिन में खेल, रात में राजनीति: इस सपने को पूरा करने के लिए 36 साल की उम्र में 18-18 घंटे मेहनत कर रहे बंगाल के खेल मंत्री मनोज तिवारी

दिन में शतक जड़कर बंगाल की रणजी टीम की पारी की ढहने से बचाने से लेकर शाम को पश्चिम बंगाल के युवा मामले और खेल मंत्री तथा शिबपुर से तृणमूल कांग्रेस विधायक के रूप में मनोज तिवारी के लिए यह एक दिन के काम में है। यही वजह है कि मनोज तिवारी की दिनचर्या काफी व्यस्त रहती है। राजनीति के साथ खेल को मैनेज करने के लिए उन्हें दिन में 18-18 घंटे काम करने पड़ता है।

एक मंत्री और क्रिकेटर के रूप में अपनी दो भूमिकाओं के बीच संतुलन बनाने के लिए मल्टी-टास्किंग बड़ा सवाल है। जब उनकी टीम के साथी फिर से सक्रिय होने के लिए शाम को आइस बॉथ लेते हैं और तब मनोज तिवारी (36) आधिकारिक काम में लग जाते हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में मनोज तिवारी कहते हैं, ‘मुझे अब इसकी आदत हो गई है। निर्वाचन क्षेत्र का बहुत काम है। किसी को आधार कार्ड के लिए लेटर की जरूरत है और भी इधर-उधर के कुछ छोटे-मोटे मुद्दे होते हैं। साथ ही, हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि हमारी सरकारी योजनाएं लोगों तक पहुंचे।’

वह कहते हैं, ‘कई फाइलें और दस्तावेज हैं जिन पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता है, इसलिए मेरा दिन लंबा होता है। चूंकि मैं मैच खेल रहा हूं और अपने निर्वाचन क्षेत्र के कार्यालय नहीं जा सकता, इसलिए मैंने फाइलों को यहां कुरियर करने के लिए कहा है। मैं फाइलों पर हस्ताक्षर करता हूं और उन्हें भेजता हूं, ताकि मेरे काम में बाधा न आए। इसके बाद मैं अपने कार्यालय को फोन करता हूं और लंबित कार्य की स्थिति की जांच करता हूं। मेरे पास ऐसे लोग हैं जो मुझे उन चीजों पर रोजाना अपडेट देते हैं, जिन्हें करने की जरूरत है।’

कहना गलत नहीं होगा कि मनोज तिवारी का पहला निर्वाचन क्षेत्र क्रिकेट है। उन्होंने गुरुवार यानी 16 जून 2022 को बेंगलुरु में मध्य प्रदेश के खिलाफ रणजी ट्रॉफी सेमी फाइनल में शतक बनाया। बंगाल ने मैच के दूसरे दिन मध्य प्रदेश को 341 रन पर समेट दिया। हालांकि, यह उनकी (102) और शाहबाज अहमद (116) की शतकीय पारियां ही थीं, जिनके दम पर बंगाल पहली पारी में 273 रन तक पहुंच पाया।

मनोज तिवारी जब क्रीज पर आए थे तब बंगाल ने 4 ओवर में 11 रन के स्कोर पर 3 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद उन्होंने कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन और बाद में शाहबाज अहमद के साथ मिलकर बंगाल की लड़खड़ाती पारी को संवारा। मनोज तिवारी ने बताया, ‘मैं पहले भी ऐसी स्थितियों में रहा हूं। यह केवल अपने सभी प्रयासों को किसी विशेष कार्य में झोंक देने और सत्र दर सत्र खेलने की बात है। मैंने शाहबाज से कहा कि हमें जितना हो सके क्रीज पर टिकने की कोशिश करनी चाहिए, रन बाद में आ जाएंगे।’

दाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज मनोज तिवारी ने 12 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और तीन टी20 इंटरनेशनल में भारत का प्रतिनिधित्व किया। मनोज तिवारी पूरी तरह से जानते हैं कि उनका टीम इंडिया का सपना खत्म हो गया है। पिछली आईपीएल नीलामी में वह अनसोल्ड भी रहे थे। ऐसे में उनके आईपीएल में खेलने की संभावनाएं खत्म हो गईं हैं। अब सवाल यह है कि वह अब भी पेशेवर क्रिकेट क्यों खेलते हैं?

मनोज तिवारी ने बताया, ‘यह मेरा सपना है कि बंगाल एक दिन रणजी ट्रॉफी जीते। जब मैं कप्तान था तब मैं चाहता था कि ऐसा हो, लेकिन दुख की बात है कि तब ऐसा नहीं हुआ। अब, मेरे जीवन में कम से कम एक बार रणजी ट्रॉफी जीतने वाली टीम का हिस्सा बनने की इच्छा है। यही एकमात्र कारण है जिसने मुझे प्रेरित किया है।’
गुरुवार को शतक जड़ने के बाद मनोज तिवारी ने अपनी जेब से एक लेटर निकाला और बंगाल के ड्रेसिंग रूम की तरफ दिखा दिया। उस लेटर में मनोज तिवारी ने अपने परिवार को उनका समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया था।
मनोज तिवारी ने कहा, ‘यह सफर आसान नहीं रहा। पहले मैं सिर्फ क्रिकेट खेलता था। अब मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिलता है। ऐसे भी दिन होते हैं जब मैं रात के 1 बजे घर पहुंच जाता हूं और अगली सुबह जल्दी उठकर पार्टी के कार्यक्रम के लिए निकल जाता हूं। मेरी पत्नी मेरे पीछे समर्थन का पिलर रही है।’

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