टीम इंडिया में नहीं मिला मौका तो पहुंचा नीदरलैंड, ठोका तूफानी अर्धशतक, पाकिस्तान को छुड़ाया पसीना, बाबर आजम की बढ़ा दी टेंशन

भारत में दिन प्रतिदिन नए-नए क्रिकेटर आ रहे हैं, जिस वजह से यहां पर खिलाड़ियों के बीच भी बहुत ज्यादा कम्पटीशन हो चुका है। इस वजह से बहुत सारे क्रिकेटर भारत छोड़कर दूसरे देशों के लिए खेलने चले जाते हैं। आपने दुनिया की कई टीमों में भारतीय खिलाड़ियों को खेलते देखा होगा और वो अच्छी प्रदर्शन की बदौलत चर्चा में भी रहे हैं।

इन दिनों नीदरलैंड और पाकिस्तान के बीच तीन वनडे मैचों की श्रृंखला खेली जा रही थी, जिसमे पाक को शानदार जीत मिली है। वह ओडीआई सीरीज अब समाप्त हो चुका है, लेकिन उस दौरान नीदरलैंड के कई खिलाड़ियों ने अपनी प्रदर्शन से फैंस का दिल जीता है। आज हम एक ऐसे खिलाड़ी के बारे में बात करने जा रहे हैं जो भारत से ताल्लुक रखता है और वो नीदरलैंड के लिए खेलते हुए पाकिस्तान को अकेले ही पसीने छुड़ा दिया है।

टीम इंडिया में नहीं मिला मौका तो पहुंचा नीदरलैंड

भारत में क्रिकेटरों की कोई कमी नहीं है, इस वजह से यहां पर दूसरे देशों के मुकाबले बहुत ज्यादा कम्पटीशन बढ़ गया है। जब किसी खिलाड़ी को लगता है कि उन के लिए इंडियन टीम में जगह बनाना मुश्किल है तो उस स्थिति में वो अमेरिका, नीदरलैंड और आयरलैंड जैसे देशों में जाकर क्रिकेट खेलने लगते हैं।

आज हम बात कर रहे हैं नीदरलैंड के लिए बतौर ओपनर खेलने वाले युवा बल्लेबाज विक्रमजीत सिंह के बारे में। जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अंतिम वनडे मैच में बेहतरीन अर्धशतक लगाया है, लेकिन अंत में जाकर उनकी टीम 9 रनों के मामूली अंतर से हार गई।

विक्रमजीत सिंह का जन्म 9 जनवरी 2003 को भारत के पंजाब राज्य में हुआ था। लेकिन वो बहुत जल्द इंडिया छोड़कर नीदरलैंड चले गए, क्योंकि उन्हें लगा कि भारतीय टीम में जगह बनाना आसान नहीं है। भारत में बड़े-बड़े दिग्गज खिलाड़ी मौजूद है, जिन्हें टीम में मौका नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से विक्रमजीत सिंह नीदरलैंड के लिए खेलने लगे।

पाकिस्तान को छुड़ाया पसीना

पाकिस्तान के विरुद्ध खेले गए तीसरे और अंतिम वनडे मैच में विक्रमजीत सिंह 85 गेंदों का सामना करते हुए 50 रनों की बेहतरीन अर्धशतकीय पारी खेली है। उस दौरान उन्होंने 7 चौका भी लगाया है। उस मैच में जब तक विक्रमजीत सिंह बल्लेबाजी कर रहे थे तब तक पाकिस्तान टीम के कप्तान बाबर आजम टेंशन में नजर आ रहे थे। क्योंकि बाबर को डर था कि विक्रमजीत सिंह आउट नहीं हुए तो पाकिस्तान वह मुकाबला नहीं जीत पाएगी।

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